Corona
सुबह हर दिन के जैसी है
हैं सड़कें भी वो कल जैसी
हवाएँ जानी-पहचानी
मेरी धड़कन भी कल जैसी
दुकानें है खुली देखो
आवाज़ें भी हैं कल जैसी
मकानों से निकलते लोग
भीड़ गलियों में कल जैसी
हाँ मैली हैं दीवारें और
हैं सड़कों पर पड़े कचरे
मगर देखे कौन इसको
है लापरवाही कल जैसी
चली आयी सबा मैली
सभी सड़कें हुईं ख़ाली
बदलते नीयमों से हो रही
धरती यह "कल" जैसी
© नितिन शर्मा
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