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अस्पताल की सीढ़ियां

 जीवित हैं जब तक स्वस्थ रहें मुस्कुराएं  ईश्वर किसीको अस्पताल की सीढ़ियां न चढ़ाये  उलझन तड़पन दर्द अनेकों  चीख पुकारें जहाँ भी देखो  भागम भाग है सुर्ख लाल सी  सरकती ज़िंदगी पड़ी आलसी  ऐसा समय किसी का ना आये। ..  ये न पीना वो न खाना  आते जाते नर्स रोकती  चंद मिनिट भी सोना मुश्किल  सुइयां  तरह तरह की भोंकती  ऐसी पीड़ा किसी को ना आये। ...  आवाज़ें होती मद्धम जैसे  शरीर में जैसे जान नहीं हों  लेकिन ये दर्द एहसास कराता  जैसे दुख की पहचान यही हो  ऐसी वेदना किसी को न पहुचाये। ..  वे भयावह दृश्य अब उस पार हैं सारे  स्वस्थ शरीर में अलग दीखते नज़ारे  ये भगवन हम तेरी माया से हारे  यही प्रार्थना सांझ सकारे  सभी स्वस्थ रहें , कभी दुःख न पाएं  तू किसी को भी अस्पताल की सीढ़ियां न चढ़ाये