रात आ गई है

रात गयी है - साथ गयी है 
पलकों पे पल पल, लहरों सा कल कल 
हमें लेके उड़ती हवाएँ ये चंचल 
समय का आँचल, लहरा रहा है 
और इस आँचल में थोड़ी सी ख़ुशियाँ, प्यारी सी बतियाँ 
) 
थप थप थपाती हथेली, धक धक बहर की सहेली 
जैसे सुलझती मद्धम मद्धम, चलती ठहरती पहेली 
इस धड़कन में - सोचो तो क्या है 
थोड़ी सी ख़ुशियाँ, प्यारी  सी बतियाँ 
रात गयी है - साथ गयी है 

) आए हैं कुछ मेरे अपने, दस्तक देते हैं सपने 
मैंने खोली मन की सांकर, लगी मेरी आँखें सजने 
और इन आँखों में - सोचो तो क्या है 
थोड़ी सी ख़ुशियाँ, प्यारी  सी बतियाँ 
रात गयी है - साथ गयी है 

) रोशन होगा सवेरा, कुछ तेरा कुछ मेरा 
कोरा काग़ज़, स्याही समय की 
लगेगा ख़यालों का डेरा 
और इन ख़यालों में - सोचो तो क्या है 
थोड़ी सी ख़ुशियाँ, प्यारी  सी बतियाँ 
रात गयी है - साथ गयी है

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