जिसने नाम तेरा कभी गाया नहीं
जिसने नाम तेरा कभी गाया नहीं मैं हूँ वो जो कभी मुस्कुराया नहीं ये मुकद्दर मेरा , थक गया हूँ प्रभु वक्त मुझको तेरे दर पे लाया यहीं तेरी आवाज़ यूँ तो मैं सुनता रहा बात तेरी कभी मैंने मानी नहीं कीर्तन और भजन दूर की बात है पीर मैंने पराये की जानी नहीं कर्म कहते किसे , धर्म होता है क्या मैंने खुद को कभी समझाया नहीं तुझसे माँगा जनम मैंने पाया प्रभु ये परिवार उपहार सब हैं दिए करता सक्षम मुझे दाता हर हाल तू मुझको अपनी हथेली पे फिरता लिए किये एहसान इतने हर एक मोड़ पर क़र्ज़ जन्मों जन्म भर पाया नहीं तूने पाया मुझे कभी रोता हुआ कभी खोया था मैं माया के मोह में मैं मलिन ही रहा काम और क्रोध से तूने फिर भी गले से लगाया मुझे भगवन थामे रहना तू मुझको यूँही हर पल ध्यान रहे मुझे तेरा यहीं जिसने नाम तेरा कभी गाया नहीं मैं हूँ वो जो कभी मुस्कुराया न