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किसका अंत

ये दर्द कैसा था ? क्यूँ लोग रोने लगे   क्यूँ इच्छाएँ सब खो गयीं , सब रोग सोने लगे ?   ये चीख़ पुकार किसके लिए है कुछ तो बताओ   क्यूँ रो रहे हो ? यह  मदप्राय- सा कौन  लेटा   है बीच में ? मेरे ही कपड़े , मुझसा ही चेहरा   मुझ से ही नैन नक़्श, रंग गहुआं गहरा   मैं ?   क्या मेरे लिए रो रहे हो ? मैं यहीं   हूँ - यहीं ! क्यूँ उदास हो रहे हो   याद है न,   पुष्पा लाला का क़र्ज़ चुकाना है अभी   मुन्ना ! तुम्हें स्कूल में अव्वल आना है - इस बार भी   सुनो मुझे ! तुम सुनते क्यूँ नहीं ? ओह ! शायद साथ हमारा छूट गया , घड़ा मिट्टी का टूट गया   अब मैं वो नहीं रहा   जब से जन्मा था , तब से मैं वो था ही नहीं   मैं यही था , जो अब एहसास हो रहा है   आ - घर के कोने में बैठ जा यहाँ   अब तू आज़ाद है , क्यूँ उदास हो रहा है   हाँ वो चेहरा मेरा था मगर मैं व...