नया वर्ष
कुछ बिछड़े साथी , कुछ साथ हैं कुछ नए रिश्ते हम भी , जान गए धन्यवाद सब लमहों का कुछ रूठे हमसे कुछ मान गए जो सीखा है हमने तुमसे उस सबक़ को याद रखेंगे हम जो मायने रखती हैं यादें उन ही को ले साथ चलेंगे हम अब नए वर्ष की नयी किताब नयी उधेड़ बुन नया हिसाब कुछ नए मिलेंगे अनुभव आगे नए छोर , नया सफ़र , नए धागे टुकुर टुकुर जीवन को लेकर और ठहाके और ठिठोली डगर डगर गिर गिर के फिर उठना नया ढंग नए रंग रंगोली - नितिन शर्मा