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कटी पतंग

 कटी पतंग अगर किसी शाख पर अटकी दिखे अगले ही पल कोई अवधारणा न बना लेना आसमानों की ऊंचाइयां छूकर आई होगी कितनों के दिल गद गद कर बादलों में लहराई होगी टूटा दिल लिए आज जो मुरझाई सी बैठी है वो भी कभी फूलों सी खिलखिलाई होगी कटी पतंग अगर किसी शाख पर अटकी दिखे अगले ही पल कोई अवधारणा न बना लेना आसमानों की ऊंचाइयां छूकर आई होगी कितनों के दिल गद गद कर बादलों में लहराई होगी जब मस्ती में लहराती हंसती मुस्कुराती सी अचानक पराये मांझे से उलझी होगी दिल धक् से रह गया होगा रोइ होगी चिल्लाई होगी कटी पतंग अगर किसी शाख पर अटकी दिखे अगले ही पल कोई अवधारणा न बना लेना आसमानों की ऊंचाइयां छूकर आई होगी कितनों के दिल गद गद कर बादलों में लहराई होगी देखी हैं इसने भी शौहरत अपने मालिक की आँखों में खुद के लिए शाबाशियां सुनी हैं इसने अपने कानों में क्या हुआ की अब सब लुटा के बैठी है , मगर इसके लिए भी कोई कहानी तो ऊपर वाले ने बनाई होगी कटी पतंग अगर किसी शाख पर अटकी दिखे अगले ही पल कोई अवधारणा न बना लेना आसमानों की ऊंचाइयां छूकर आई होगी कितनों के दिल गद गद कर बादलों में लहराई होगी

दुकानें चलती रहें

नाम क्या है क्या है कनुबा  क्या करता परिवार चलाने को  क्या है ज़रुरत अगले की  ये सारी , जानकारी  अपनी गठरी में भरकर  उसकी आँखों में झांको  फिर फांको  उसके जेब की गिन्नी  एक एक अठन्नी  जब मन भर जाये  फिर सूँघो उसके मन की  और किस कोने में  बचे हैं अगले के अरमान  घोंप दो उसके सीने में  जो छुरी छुपाई है  पीठ सहारे तुमने  ध्यान रहे वो मरने न पाए न चीख ही निकले  उसे मालूम भी न हो  कि छुरी उसके आर पार है  अब तुम्हारे हाथों उसका  सारा संसार है  तुम चैन से सोते रहो  और वो जागने न पाए तुम्हारे जकड से  कहीं भी वो भागने न पाए   बस, यही दोहराना है  हमें अपना पेट भरना है  खुद का परिवार चलाना है  दुकानें चलती रहें यूँ ही  इंसानियत मरती रहे यूँ ही    

साथ चलते रहना

  जब तक है मोम मेरे साथ जलते रहना और फिर अगली मोम तक मेरे साथ चलते रहना बाती नई, साथी वही सदा जिसकी हर पल बुलाती रही तुम ही तो हो मेरे साथ गिरते-संभलते रहना मेरे साथ चलते रहना - नितिन शर्मा ०७.०१.२३