हाथ में फोन है मेरे
हाथ में फोन है मेरे और सिर पे एप्प चढ़ जाए बगल में बैठे हैं अपने सभी से गैप बढ़ जाये नई दुनिया बुने जाते है जो देखी नहीं हमने गढ़ी कुछ नई लकीरें सी जो हर एक टैप गढ़ जाए हूँ मैं व्यक्ति अभिव्यक्ति - अधिकार हैं मेरा स्टेटस रोज़ हो अपडेट संसार है मेरा ये दिखते अंक हैं और कुछ नहीं जो खींचते मुझको नहीं तो कितनी कवितायें बनी श्रृंगार हैं मेरा अपने पास के रिश्ते हों न उनमे हो तनिक दूरी करू मई टाइप रिश्तों को और तनिक swipe किश्तों को जब जितना ज़रूरी हाथ में ये फ़ोन तब आये फ़ोन को यूज़ करूँ - लेकिन न लूज़ करूँ जो परिवार है मेरा