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याद है न?

If you cannot see the audio controls, listen/download the audio file here अपना न मान लेना कुछ भी   जो हाथ में लिए बैठे हो ,  सब मेरा है ..  याद है न ? गाड़ियाँ ,  मकान,  ये सामान, ये रिश्ते,  सम्मान   इनमें लहरा तो रहे हो , बौरा न जाना   सब मेरा है ...  याद है न ? बीमारी में मेरा ख़याल है   तुम्हें ज़िंदगी से सवाल है   दुखों में मेरी ओर रूख   और सुख में मुझसे बेरुख़ी   ठहाके लगा कर हँसता हूँ   तुम्हारी नादानी पर .  मेरी मौजूदगी ,  याद है न ?  रूठते हो , मनाते हो   खीजते हो , सताते हो   इनको जिन्हें   जानकार कहते हो   इनको जिन्हें   सलाहकार कहते हो   तुम्हें आ आ कर सताएँगे   तुम सी गा गा कर सताएँगे   मगर मुझ में मगन रहकर , तुम इनसे परे रह पाओगे . मेरी सलाह ...  याद है न ? उलझना नहीं इन धागों ...

मृग तृष्णा

चित्र
If you cannot see the audio controls, listen/download the audio file here भगवान नहीं हूँ मैं , भूल कर बैठता हूँ विचारों के मंथन को , मुझ तक पहुँचते स्पंदन को वर्जित   कर न   पाया , कभी कभी उठते इंसान को , क्यूँकि मैं भगवान नहीं हूँ  ...        औरों से सुना करते थे , संतुलन की बातें   न साधु ही तर पाए , न विकृत आत्माएँ अब तक   जीवन को समझना कठिन ही सही   सभी प्रयत्नशील हैं यहाँ - कोई  ' है'   जो कभी तो   सुनेगा इस मानवीय क्रंदन को   क्यूँकि   मैं भगवान नहीं हूँ....   गिर गिर के सम्भलना प्रकृति ने सिखाया है   संभल कर आगे बढ़ पाया , कभी जीवन सजाया है   बरसों लगे पल पल , इसे हमने तराशा मगर   कभी खंडित , कभी दंडित होता हुआ नज़र आया है   क्यूँकि मैं भगवान नहीं हूँ...   मुझ तक ही फिर कर आते हुए ये जो कर्म हैं मेरे   ...