दरारें

 




"दुर्ग में पड़ी दरारें 

तूफ़ान का पानी 

पसीजी दीवारें 

भरी हर एक दरार फिर 

सहेजा बुहारा 

मैंने दोबारा 

की मरम्मत , निखारा 


अब नहीं खुलूँगा 

अब ...  फिर कभी नहीं "


- नितिन शर्मा 

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