लौट आओ
भूतों की भीड़ में भटकते भटकते
मन थक न जाए, लौट आओ
भविष्य के बहकावे में न आ जाना
देखो मन दुःख न पाए , लौट आओ
ऐ कर ! कल जो तुमने कर दिया था
अब वो नित्य ठोस है
क्यों रोते हो , उस पर, जो बीत गया
क्यूँ कर उस पर अफ़सोस है
पुराने ज़ख्मों को मत कुरेदो
कहीं तन दर्द न पाए, लौट आओ
रहो मेरे साथ , यहाँ , इस पल
खिलो , खिलखिलाओ , बन चंचल
है सपाट सा ललाट इस पल का अभी
लिख दो कहानी अनकही
स्वर्ण अतीत गढ़ लो तुम भी
सपने अधूरे न हों अंत समय
गुहार लगाता हूँ मैं तुम्हे
सुनो , ग्रहण लग न जाये , लौट आओ
मन थक न जाए, लौट आओ
भविष्य के बहकावे में न आ जाना
देखो मन दुःख न पाए , लौट आओ
ऐ कर ! कल जो तुमने कर दिया था
अब वो नित्य ठोस है
क्यों रोते हो , उस पर, जो बीत गया
क्यूँ कर उस पर अफ़सोस है
पुराने ज़ख्मों को मत कुरेदो
कहीं तन दर्द न पाए, लौट आओ
रहो मेरे साथ , यहाँ , इस पल
खिलो , खिलखिलाओ , बन चंचल
है सपाट सा ललाट इस पल का अभी
लिख दो कहानी अनकही
स्वर्ण अतीत गढ़ लो तुम भी
सपने अधूरे न हों अंत समय
गुहार लगाता हूँ मैं तुम्हे
सुनो , ग्रहण लग न जाये , लौट आओ
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