हिरास




बुढ़ापा आएना, बुढ़ापा आएना
बेबसी और लाचारी की
लाठी हमें थमाए न
बुढ़ापा आएना , बुढ़ापा आएना


कभी नरम नरम कभी सख्त सख्त ये
वक्त गुज़रता जाता है
जाने अनजाने वो हथेली पर
कुछ लिखता जाता है
इन रेखाओं के चक्रव्यूह में हमको और फसाये न
बुढ़ापा आएना, बुढ़ापा आएना

मान किया न ध्यान दिया , कभी तुमने इस उपहार का
कभी किश्तों का कभी रिश्तों का तुम्हे ध्यान था इस संसार का
जो जन्मा है वो मिट के रहेगा , सबक तुम्हे सिखलाएगा
बुढ़ापा आयेगा, बुढ़ापा आयेगा

कभी घुटनों में कभी टकनों में इस दर्द मरे का राग बुरा
आलू गोभी में स्वाद नहीं लगता सरसों का साग बुरा
छाती में कफ का घेरा है ये पल पल मुझे सताए न
बुढ़ापा आये न ... बुढ़ापा आये न

जब हरियाली भरे बाग़ में तेरे नाती पोते खेलेंगे
तुझे छू छू कर भागेंगे तेरे हाथ से लाठी लेलेंगे
अपने दिन तू भी याद करेगा देख उन्हें मुस्काएगा
बुढ़ापा आयेगा, बुढ़ापा आयेगा

इन आती जाती साँसों की जब अवधि पूरी होएगी
मन राम रमे , मुस्कान हो मुख पर दुनिया ओझल होएगी
तब बदलेगा ये वस्त्र पुराना , वक्त तुझे नहलाएगा
बुढ़ापा आयेगा, बुढ़ापा आयेगा ...

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