बतियाती डायरी







मेरे हाथों में मुस्कुराती है
मुझसे बतियाती है डायरी
पन्ना दर पन्ना सीखती रही
पलटता हूँ , सबक याद दिलाती है डायरी
हाँ मुझसे बतियाती है डायरी

जब पाता हूँ , खुद को , अंधेरों के साए में
इस डायरी के पन्नों की महक लिया करता हूँ
किसी उलझन से जूझता हुआ आहें भरता हूँ
तब, दिलासा के दीप जलाती है डायरी
हाँ मुझसे बतियाती है डायरी

चलता रहूँ, बढ़ता रहूँ
गिरुं भी कभी , तो संभलता रहूँ
पिता की भाँती अनुशासित करती
कभी माँ बनकर समझाती है डायरी
हाँ मुझसे बतियाती है डायरी

ग़मों का गुबार हो , ख़ुशी की बुहार हो
ठहाकों की गूँज कभी, आसुओं से श्रृंगार हो
कारी कमरी समान,हर पल को अपना जान
मेरी भावनाओं का बोझ उठाती है डायरी
हाँ मुझसे बतियाती है डायरी
मेरे हाथों में मुस्कुराती ...ये डायरी

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