ज़िंदगी के मायने
ज़िंदगी के मायने समझ आने लगेंगे जब बोझ अपने अरमानों का छाँट लोगे तुम हरीतिमा अपनी ही बगिया में नज़र आने लगेगी जब खुद सहेजे फूल दूसरों में बाँट दोगे तुम नहीं चाहिए और, और कुछ नहीं चाहिए अब, चाह की लम्बी सूची जब सिकोड़ लोगे न हटा कर रिश्तों से मतलबी चादर जब, इंसान देख लोगे अपेक्षाओं से सारे सूत जब काट दोगे तुम ज़िंदगी के मायने समझ आने लगेंगे कुछ पापा से सीखा कुछ मम्मी ने बताया, कुछ अंकल कह गए कुछ ताऊ ने समझाया इधर उधर की धूल जब खुद से झाड़ दोगे फजूल के सीखे हुए पाठ जब बिसार दोगे, ज़िंदगी के मायने समझ आने लगेंगे अतीत से छुड़ा कर दामन, भुजाएँ समेट कर भविष्य से आज बैठ लें इस पल की साँस पर, आँखें मूँद कर बूँद भर पी लें ज़िंदगी ऐसी अलौकिक प्यास जगा लोगे, ज़िंदगी के मायने समझ आने लगेंगे नितिन शर्मा