भजन : तुम बिन मेरा नहीं अपना कोई और
तुम बिन मेरा नहीं अपना कोई और
तुमहयी मेरे ठाकुर तुमहयी मेरे ठौर
किस को मनाऊँ मैं किस को रिझाऊँ
किस से करूँ है ज़िद, है किस पर ज़ोर
तुमहयी मेरे ठाकुर तुमहयी मेरे ठौर
इत पकड़ूँ उत सरपट भागे
मन प्रभु तुम बिन थिरकत लागे
लगती लगाम जब रौशनी सी डोर
तुमहयी मेरे ठाकुर तुमहयी मेरे ठौर
तुम बिन मेरा नहीं अपना कोई और
तुमहयी मेरे ठाकुर तुमहयी मेरे ठौर
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