चाँद सबका अपना अपना
चाँद सबका अपना अपना
मेरा चाँद तेरा नहीं
तेरा चाँद मेरा नहीं
चाँद है, सबका अपना अपना !
कभी बोलता कुछ भी नहीं
फिर भी बातें बहुत करता है
वह चाँद जो दूर
आसमां पे सजता है -
तो क्या है भाषा
इस चाँद की
जिसने बिना टिकट कटाए
सदियाँ नाप ली
मेरे आंसुओं में बहता है
यह चाँद मेरी मुस्कान पे रहता है
मेरी त्योहरियों पे दिखता है
दिल की ज़बान कहता है
रात की गहराइयों में
कभी सुबह की अंगड़ाइयों में
बुलाता है मुझे यह चाँद
मेरी उदासीन तनहाइयों में
"आओ पास ज़रा, बात करें
कहो कैसे हो, जज़्बात धरें"
दिल की धड़कन सम्भल जाती है
चाँद आता है जब यूँ साथ मेरे
तेरा चाँद क्या ऐसा है?
बिलकुल मेरे चाँद के जैसा है?
हाँ, होता है - चाँद सबका अपना अपना
तेरा चाँद मेरा नहीं - मेरा चाँद तेरा नहीं
चाँद? सबका अपना अपना
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