शुक्रिया
हर शाम का शुक्रिया कि दिया वो सब जिसका हक़दार मैं रहा हर सुबह लायी है अवसर नया नयी आशाएं लिए तुमसे कह रहा कह रहा कि ये मित्र , ये प्राकृतिक इत्र ये छुअन ये आर्द्रता ये हवा ये सबा ये एहसास ज़िन्दगी का तुम्हारे लिए है सुनो , कुछ बुनो , कुछ बनो कुछ बनाओ चख लो ये नीर पलों का , ये झरना.. तुम्हारे लिए ही बह रहा है नितिन - २९ / ०६ / २३