दुकानें चलती रहें
नाम क्या है क्या है कनुबा
क्या करता परिवार चलाने को
क्या है ज़रुरत अगले की
ये सारी , जानकारी
अपनी गठरी में भरकर
उसकी आँखों में झांको
फिर फांको
उसके जेब की गिन्नी
एक एक अठन्नी
जब मन भर जाये
फिर सूँघो उसके मन की
और किस कोने में
बचे हैं अगले के अरमान
घोंप दो उसके सीने में
जो छुरी छुपाई है
पीठ सहारे तुमने
ध्यान रहे वो मरने न पाए
न चीख ही निकले
उसे मालूम भी न हो
कि छुरी उसके आर पार है
अब तुम्हारे हाथों उसका
सारा संसार है
तुम चैन से सोते रहो
और वो जागने न पाए
तुम्हारे जकड से
कहीं भी वो भागने न पाए
बस, यही दोहराना है
हमें अपना पेट भरना है
खुद का परिवार चलाना है
दुकानें चलती रहें यूँ ही
इंसानियत मरती रहे यूँ ही
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