संदेश

विवाह

मुस्कुराती इन आँखों की बलाएँ ले लूँ   कि ज़िंदगी आज से रुख़ बदलने वाली है   © नितिन शर्मा  

Corona

सुबह हर दिन के जैसी है   हैं सड़कें भी वो कल जैसी   हवाएँ जानी - पहचानी   मेरी धड़कन भी कल जैसी   दुकानें है खुली देखो   आवाज़ें भी हैं कल जैसी   मकानों से निकलते लोग   भीड़ गलियों में कल जैसी   हाँ मैली हैं दीवारें और   हैं सड़कों पर पड़े कचरे   मगर देखे कौन इसको   है लापरवाही कल जैसी   चली आयी सबा मैली   सभी सड़कें हुईं ख़ाली   बदलते नीयमों से हो रही धरती यह " कल " जैसी   © नितिन शर्मा  

विवशता

  [20/05/20] Wednesday  अगर तुम्हारे लिए मैं बुरा हूँ   और मेरे लिए बुरे हो तुम   तुम्हारी ज़रूरत मेरी बर्बादी है   और मेरी ख़ुशी इसमें हो   कि मर गिरो तुम   अगर सही तुम भी हो , सही में भी   ज़िद्द पर अड़े हम दोनों हों   जीतेगा वही जो सशक्त है   जिसकी पहचान हो   जिसके सैकड़ों चाहने वाले हों   सत्य कोने में सोता रहेगा   अकेला बिलखता रोता रहेगा   सुनो   विवशता की ज़ंजीरें तुम्हें मजबूर करदेंगी   मेरा लहू बहाने पर , मुझे झूठा कहलाने पर   जब ज़रूरत की भूख तुम पर हावी होगी   तुम हिचकिचाओगे नहीं मेरा मांस खाने पर   कदाचित   तुम्हें ज़माना सही कहेगा , क्यूँकि तुम भूखे थे   मुझे भोगना तुम्हारी नीयती थी , तुम भूखे थे   तुम्हारी जान बच जाए , सो मेरी जान गँवानी थी   जंग चाह और भूख की है सारी ना मैं बुरा हुँ ना तुम ,   शरीर ह...

किसका अंत

ये दर्द कैसा था ? क्यूँ लोग रोने लगे   क्यूँ इच्छाएँ सब खो गयीं , सब रोग सोने लगे ?   ये चीख़ पुकार किसके लिए है कुछ तो बताओ   क्यूँ रो रहे हो ? यह  मदप्राय- सा कौन  लेटा   है बीच में ? मेरे ही कपड़े , मुझसा ही चेहरा   मुझ से ही नैन नक़्श, रंग गहुआं गहरा   मैं ?   क्या मेरे लिए रो रहे हो ? मैं यहीं   हूँ - यहीं ! क्यूँ उदास हो रहे हो   याद है न,   पुष्पा लाला का क़र्ज़ चुकाना है अभी   मुन्ना ! तुम्हें स्कूल में अव्वल आना है - इस बार भी   सुनो मुझे ! तुम सुनते क्यूँ नहीं ? ओह ! शायद साथ हमारा छूट गया , घड़ा मिट्टी का टूट गया   अब मैं वो नहीं रहा   जब से जन्मा था , तब से मैं वो था ही नहीं   मैं यही था , जो अब एहसास हो रहा है   आ - घर के कोने में बैठ जा यहाँ   अब तू आज़ाद है , क्यूँ उदास हो रहा है   हाँ वो चेहरा मेरा था मगर मैं व...

याद है न?

If you cannot see the audio controls, listen/download the audio file here अपना न मान लेना कुछ भी   जो हाथ में लिए बैठे हो ,  सब मेरा है ..  याद है न ? गाड़ियाँ ,  मकान,  ये सामान, ये रिश्ते,  सम्मान   इनमें लहरा तो रहे हो , बौरा न जाना   सब मेरा है ...  याद है न ? बीमारी में मेरा ख़याल है   तुम्हें ज़िंदगी से सवाल है   दुखों में मेरी ओर रूख   और सुख में मुझसे बेरुख़ी   ठहाके लगा कर हँसता हूँ   तुम्हारी नादानी पर .  मेरी मौजूदगी ,  याद है न ?  रूठते हो , मनाते हो   खीजते हो , सताते हो   इनको जिन्हें   जानकार कहते हो   इनको जिन्हें   सलाहकार कहते हो   तुम्हें आ आ कर सताएँगे   तुम सी गा गा कर सताएँगे   मगर मुझ में मगन रहकर , तुम इनसे परे रह पाओगे . मेरी सलाह ...  याद है न ? उलझना नहीं इन धागों ...