संदेश

बुलबुला

पानी पे बना बुलबुला मुझको सिखा गया जीने की नयी राह ये मुझको दिखा गया पानी पे बना बुलबुला ... कुछ नहीं से कुछ बना फूला सीना गर्व से ताली बजी ...खुश हुआ तकते रहे सब उसे उसे बड़ा बन जाने पे, अभिमान आगया पानी पे बना बुलबुला ... एक शिलापट्ट पे बड़ा इतरा रहा था वो हवा के झोकों के संग नाच गा रहा था वो अब सागर के संग न रहने का उसने मन बना लिया पानी पे बना बुलबुला ... दो चार छोटे बुलबुलों को उसने आमंत्रण दिया उनका मत हासिल कर आन्दोलन किया उन बुलबुलों को इसने पाठ नया पढ़ा दिया पानी पे बना बुलबुला ... उन्मत्त हवा का झोंका सब को सुखा गया उस अभिमानी बुलबुले का नामोनिशान ना रहा उसका रहम-ओ-करम है आगे हम जो बढ़ते आये हैं चुनौतियों को पार कर चोटियाँ चढ़ते आये हैं अहम् ना आने पाए कभी , फार्मूला टिका गया पानी पे बना बुलबुला मुझको सिखा गया

हे परंपिता !

कल फिरसे भूख लगेगी मुझे कल फिरसे खाना मागुंगा कुछ ख्वाब मुकम्मल आज हुए कल और मुरादें मागुंगा जब आस बिखरकर टूटेगी कभी हाथ न कुछ भी आता दिखे जब मूँद के आँखें बैठुंगा और तुमसे होता नाता दिखे पिघलने को, मैं सँभलने को तब तेरी बाहें मागुंगा कुछ ख्वाब मुकम्मल आज हुए कल और मुरादें मागुंगा सपनों की लकीरें हाथ लगें जब आंसू ख़ुशी के आँख भरे जब कद ऊंचा सा लगता हो तारीफें दुनिया आन करे तुझसे ना लेश भी दूरी हो तब भी तेरी साह मैं मागुंगा कुछ ख्वाब मुकम्मल आज हुए कल और मुरादें मागुंगा कहते हैं तुझसे आये हैं तुझमें मिल जाना है हमको उस रोज़ दिखेगा नूर तेरा धुल जाना है तब इस तम को तब तक तेरे नाम की होती रहें ऐसी बरसातें मागुंगा कुछ ख्वाब मुकम्मल आज हुए कल और मुरादें मागुंगा

अनुकूलता

सवेरे जल्दी उठाना होता है मुझे गरम चाय का प्याला और नाश्ता अपनों का प्यार स्पर्श दुलार तैयार होकर दफ्तर तक समय पर पहुँचने का साफ़ रास्ता व्यस्त रहता हूँ मैं दिन भर दोपहर का खाना भी ज़रूरी है भूख जो लगती है दिन में पानी भी पीता हूँ प्यास जो लगती है शरीर स्वस्थ है मेरा सांस लेने को पर्यावरण भी स्वच्छ चाहिए आज़ाद समाज में रहता हूँ मैं सरकार भी इमानदार चाहिए कहीं भूख से व्याकुल सोता न हो कोई बच्चा खिलौने को रोता न हो गली में दीखते भिखमंगे न हों धर्म के नाम पर ये दंगे न हों जब तक कोई आपदा हमारे सर न हो कितने सुकून में जी रहे हैं कब एहसास होता है शाम होने लगी है फिर भूख लग आई है प्रभु कृपा से खाना तैयार मुझतक आ ही जाता है टी वी का कुछ मनोरंजन पाकर इस किताब का एक पन्ना पढ़कर अब नींद आने लगी है आज बाहर की हवा सर्द है पास ये कम्बल रख लेता हूँ इसे ओढ़ लेता हूँ अब ,नींद भी आ रही है सोना है अब, कल सवेरे जल्दी उठाना है मुझे.......

ज़िन्दगी

चित्र
हर नए मोड़ पर नयी बात सिखाती है ज़िन्दगी कुछ लोग आते हैं चले जाते हैं .. नए लोगों से तार्रुफ़ कराती है ज़िन्दगी वक्त रहते , सब कुछ बदल जाता है इस दिल का आइना दिखाती है ज़िन्दगी लव्जों में लहजा और जीने की तहजीब अपने ही अंदाज़ में बताती है ज़िन्दगी इश्क करना इस खुदा से और खुद से , बेखबर है इबादत ज़िन्दगी ये , एक छोटा सा सफ़र जिस खुदा ने तुझे इस ज़मीन पर बड़े नाज़ से तकसीम कर भेजा तुझे ईमान से उसके लिए कुछ कर गुज़र ख़याल रखना अपनों का , उन्हें आंच न आये कभी और सींचना अपने सपनो को, सूखने न पाएं कभी न उम्मीद हो किसी कर्म से न मांग हो तेरी कोई बिन मांगे ही कैसे कैसे तोहफे दे जाती है ज़िन्दगी हर नए मोड़ पर नयी बात सिखाती है ज़िन्दगी कुछ लोग आते हैं चले जाते हैं .. नए लोगों से तार्रुफ़ कराती है ज़िन्दगी