आँखों देखा हाल
छूट कर जब बादलों से बूँद धरती पर गिरी
घूँट मिट्टी ने जो पीया प्यास उसकी तब बुझी
बीज माली ने था बोया राहतें पाने लगा
एक नए संसार की वो चाहतें पाने लगा
देखते ही देखते बारात बूंदों की उठी
काले-काले बादलों से निचुड़कर गिरने लगी
ख़ुशी संभाले नदियाँ नाले पोखर सब भरने लगे
लत्ते भीगे पत्ते भीगे सबके दुःख हरने लगे
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(Jiska man dukhi hota hai .. use dukh ki bhasha samajh aati hai
jiska man praffullit hota hai boond uske saath vaisi baat karti hai
bheena bheena ---- emotions)
तरतराती झरझराती पवन संग जब डोलती
बूँदें लहराती है भाषा नित नई ये बोलती
नृत्य करती जैसे कोई इठला रही नृत्यांगना
ऐसा भीना-भीना करती सभी का घर अँगना
सौंधी-सौंधी खुशबुएँ हैं सांस लो गहरी ज़रा
खुश हैं बादल रंग अब इनका भी लो धुलने लगा
जा रहा है देके खुशियां श्वेत वो बादल वहां
खिल रहा है पत्ता पत्ता झिलमिलाता आसमां
देखो देखो सूरज झांके बादलों की ओट से
चहचहाते पंछी निकले पेड़ों की नन्ही गोद से
फड़फड़ाते पंख ऐसे अब सुखाने के लिए
मैं भी निकला हूँ एहि धुन अब सुनाने के लिए
हाल मेरी आँखों देखा सब सुनाने के लिए
हाल मेरी आँखों देखा सब सुनाने के लिए
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