तितली

 


मेरे अस्तित्व के गहरे तमस में पनपते कीड़े दिखाई दिए मुझे 

तो कभी चमकता हीरे का टुकड़ा नज़र आया 

खुद से बाहर जब भी देखा 

मैंने अपने आप को ही 

रोता , हँसता , चीखता 

तड़पता बिलखता 

छिपता निकलता पाया 


खंगालते हुए अपने खौफ 

अपने आप को पाया मैंने 

दुनिया के झूठे सबक भुला कर 

कुछ यूँ खुद को 

तितली की तरह 

उड़ाया मैंने 


नितिन शर्मा - १७/१२/२०२१ 

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