मेरी प्यारी-सी बगिया
फूलों से भरी मेरी प्यारी-सी बगिया
जहाँ तितलियों ने अपने रंगों को
बड़े प्यार से बिखेरा है
हर कली कल के सपने देखते हुए
मेरे आने का , मुझसे बतियाने का
बेसब्री से इंतज़ार करती हैं
रात को सोता हूँ तो इस ख़याल से
कि कल सुबह फिर उन फूलों से मिलूंगा
ये फूल जो प्रतीक हैं मेरे जीवन में महक रहे
ख़ुशियों भरे पलों के
वो टूटा हुआ सूखा पत्ता
जो ज़मीन पर गिरा पड़ा है
मुझे अफ़सोस है कि अब
इस बाग़ से उसे मुख़्तलिफ़ होना होगा
लेकिन
वह भी हिस्सा रहा है
मेरी खुशनुमा ज़िंदगी का
कोई राहगीर अगर मेरे बगीचे से उठ रही
सुगंध पाकर मुस्कुराता है
फिर भी मुँह चिढ़ाता है
तो वह उसका अपना मसला है
मैं सब को वही दूंगा
जो खुदा ने मुझे बक्शा है
खुदाई , खुशियां और खुश्बू
- नितिन
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